Sambhaji Maharaj History in Hindi

Sambhaji Maharaj History in Hindi

Son of Chatrapati Shivaji Maharaj — Chhatrapati Sambhaji Maharaj

Sambhaji Maharaj History in Hindi – इतिहास में कई राजा हुए जिन्होंने अपना पूरा जीवन अपने देश की सेवा में ही निकाल दिया और उन्होंने अपने प्राण भी दे दिए | इनमे से एक थे Chhatrapati Shivaji Maharaj के बेटे Chhatrapati Sambhaji Maharaj, उन्होंने 9 साल के बीच में 120 लड़ाईया लड़ी और हमेशा विजयी रहे | वो आज तक एक भी युद्ध नहीं हारे | अगर पूर्ण स्वराज का अभियान Chhatrapati Shivaji Maharaj ने चलाया था तो उसे जिन्दा रखा Sambhaji Maharaj ने | लेकिन शायद ही इनके बारे में कोई जानता होगा |

जीजाबाई के आँचल में, जिसका बचपन बीता था सौ से ज्यादा युद्ध लड़े थे, सबको जिसने जीता था मुग़लों के बंदीगृह से जो, बचपन में ही छूट गया भगवा ध्वज लेकर निकला, स्वराज बनाने जुट गया | दिल्ली से दक्खन तक बजता, जिसका गाजा बाजा था वीर शिवाजी का बेटा वो, अपना शंभू राजा था

Sambhaji Maharaj History in Hindi

Sambhaji Maharaj History in Hindi

जन्म (Birth) :

ठीक आज से तीन दिन पहले संभाजी का जन्म दिन था। उनके जन्म दिवस पर उनको याद करने के लिए हुक 14 may को ही Article लिखने वाले थे। पर किसी वजह से नहीं लिख पाए। Chhatrapati Sambhaji Maharaj का जन्म 14 May, 1657 को Pune में हुआ था | जब वो दो साल के थे तब उनकी माता Sai Bai का निधन हो गया | माँ के बाद इनका पालन पोषण उनकी दादी
माँ जीजाबाई ने किया था |

शिक्षा (Education ) :

जब वो थोड़े बड़े हुए तो उनके पिता ने उन्हें आमेर के राजा जय सिंह पास युद्ध निति सिखने लिए भेज दिया | Sambhaji 13 साल की उम्र तक 13 Languages को सीख चुके थे | उन्होंने संस्कृत में कई साश्त्र लिखे | Sambhaji 16 की उम्र में पहला युद्ध लड़ने गए और यह युद्ध वो जीत के लौटे | जब वो 23 साल के हुए तो उनके पिता Chhatrapati Shivaji Maharaj की मृत्यु हो गयी | उनके बाद Sambhaji उत्तराधिकारी बने और मराठा साम्राज्य की देख भाल की |

राजनीतिक समझौते के कारण उनका विवाह येसूबाई से कर दिया गया |

Sambhaji Maharaj History in Hindi

संभाजी महाराज और औरंगज़ेब :

Sambhaji बहुत कम साशनकाल में 120 युद्ध लड़े जिनमे उनके और उनकी सेना का पराक्रम दुश्मन पर भारी पड़ा | उन्होंने उस समय दिल्ली के बादशाह औरंगज़ेब के नाक दम कर रखा था|
औरंगज़ेब उन्हें किसी भी तरह पकड़ना चाहता था | जिस समय उन्होंने सत्ता संभाली उस समय मुगलो के साथ पुर्तग़ालिओ ने भी कब्ज़ा जमा रखा था | Sambhaji ने पुर्तग़ालिओ पे तब तक हमला बंद नहीं किया जब तक उन्होंने अपनी हार नहीं मान ली |

Sambhaji औरंगज़ेब के आतंक को खत्म करना चाहते थे वो एक क्रूर् मुग़ल राजा था जिसने कई सारे हिन्दू मंदिरो को बर्बाद कर दिया था | ऐसे में उसे रोकना बहुत जरुरी था | संभाजीराजे यह बात अच्छे से जानते थे और उन्होंने औरंगज़ेब के किलो पे चढाई शुरू कर दी | संभाजीराजे ने उनके कई सेनापतियों को मार दिया था इसीलिए औरंगज़ेब उनके सामने आने से डरता था | संभाजीराजे ने बीजापुर और गोलकोण्डा सें मुगलो का साशन पूरी तरह से खत्म कर दिया था |

मराठा साम्राज्य के पास धन की बहुत कमी थी जिसके चलते इन्होने सीधे औरंगज़ेब के औरंगाबाद और बुरहानपुर पे आक्रमण करके काफी बड़ी मात्रा में धन और जेवरात इकठ्ठा किये | गुस्साए औरनग्ज़ेब ने संभाजीराजे को सबक सीखाने के लिए वो 5 Lakh सैनिक और कई सारे जानवर लेके मराठा सम्राज्य की निकल पड़ा | सबसे पहले औरंगज़ेब ने नाशिक के रामशेष किले पर आक्रमण करने का आदेश दिया |

उसका सेनापति सहाबुद्दीन खान अपने साथ 10 हज़ार सैनिको के साथ नाशिक के किले पे पहुंच गया | उसने एक दिन में किला जीतने का दावा किया | उस किले पे सिर्फ 600 सैनिक थे लेकिन सहाबुद्दीन खान फिर भी हार गया | वो लगातार दो साल तक प्रयाश करता रहा लेकिन हर बार उसे हार का सामना करना पड़ा | औरंगज़ेब ने अपने कई सेनापतिओ को भेजा लेकिन हर बार उसे हार का सामना करना पड़ता | औरंगज़ेब, संभाजी को कभी नहीं हरा पाया |

संभाजी राजे से सीधे युद्ध में जीतना असंभव था इसलिए औरंगज़ेब ने उनके नज़दीकी रिस्तेदारो के ज़रिये धोके से रायगढ़ किले से दूर बुलवाया | “ अपने रिस्तेदार ने अपने साथ धोका किया है” इसकी जानकारी जब संभाजीराजे को लगी तो तब तक काफी देर हो चुकी थी | संभाजीराजे अपने खास दोस्त के साथ अकेले ही रायगढ़ की ओर निकल पड़े लेकिन औरंगज़ेब अपनी पूरी सेना के साथ रायगढ़ को घेरे हुए था |

जब संभाजीराजे को निहत्था देख औरंगज़ेब की सेना ने उन्हें घेर लिया तब काफी देर तक किसी की हिम्मत न हुई उनके पास जाने की, फिर दूर से ही रसियो से बांधकर उन्हें कैद कर लिया गया | संभाजीराजे को औरंगबाद ले जाया गया |

“भेडिओ के चंगुल में एक शेर फंस चुका था, लेकिन शेर तो शेर होता है”

भेड़िये औरंगज़ेब ने उनके सामने तीन सर्ते रखी —

मराठा साम्राज्य का धन उसे दे दिया जाये |
संभाजीराजे अपना धर्म परिवर्तन करवा ले |
संभाजीराजे औरंगज़ेब को अपना बादशाह मान ले |

लेकिन संभाजीराजे ने औरंगज़ेब की बेइज्जती कर दी | इसे स्वीकार करना मतलब स्वराज की बेइज्जती करना | और ये संभाजीराजे को आखिरी साँस तक मंजूर न था |

Death(मृत्यु) :

गुस्साए औरंगज़ेब ने उन्हें 40 दिन तक लगातार Physically और Mentally Torture किया | कभी उनकी आंखे निकाली गयी, कभी उनके हाथ काटे गये, और कभी उनकी जुबान | ऐसा औरंगज़ेब रोज करता था | उनसे हर रोज़ पूछा जाता की “क्या शर्ते मंजूर है” और उनका जवाब था “नहीं” | और 40 दिन बाद 11 March, 1689 दिन उनका स्वर्गवास हो गया |

Sambhaji की मृत्यु के बाद सारे मराठा एक हो गए। हर औरत सेना मै आ गई हर पत्ता तीर बन गया। उसके बाद दुबारा युद्ध हुआ और उसी युद्ध मै Aurangez को मार दिया खतम हो गया।

गर्व है मुझे की मैने इस मिट्टी मै जन्म लिया जहा वीर Maratha Sambha जी महाराज का जन्म हुआ पर दुख है मुझे देश आज ऐसे वीरों को भूलते जा रहा है।

sambhaji maharaj history in hindi

देश धर्म पर मिटने वाला शेर शिवा का छावा था । महा पराक्रमी, परम प्रतापी , एक ही शंभू राजा था

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